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Saturday, 23 June 2018

सोज की सोच से सामने आया कांग्रेस का चाल, चरित्र और चेहरा



कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद और सैफुद्दीन सोज की सोच पर सियासी घमासान मचा हुआ है. दरअसल 2019 के आम चुनाव मे अब कम वक़्त बचा है. जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहे हैं ऐसी बहुत सी चीजें हैं जो मुद्दा बनती जा रही हैं और जिनपर सियासत हो रही है. बात जब चुनावी मुद्दे की हो तो कश्मीर और आतंकवाद हमेशा से ही देश के राजनीतिक दलों का मनपसंद मुद्दा रहा है. कश्‍मीर घाटी में सेना द्वारा किए जा रहे एक्शन पर जिस तरह सैफुद्दीन सोज और गुलाम नबी आजाद जैसे नेता बयान दे रहे हैं, कहना गलत नहीं है कि आतंकी और ये नेता अपने विचारधाराओं की आखिरी लड़ाई लड़ रहे हैं. वरिष्ठ कांग्रेसी नेता गुलाम नबी आजाद ने बीते दिनों ही ये कह कर सबको सकते में डाल दिया था कि सेना ऑपरेशन ऑल आउट के नाम पर घाटी के आम नागरिकों का 'नरसंहार' करेगी. सरकार और सेना की आलोचना का दौर चल ही रहा था कि एक और वरिष्ठ कांग्रेसी नेता के बयान से देश की जनता के सामने कांग्रेस का चाल, चरित्र और चेहरा सामने आ गया.
पूर्व केंद्रीय मंत्री सैफुद्दीन सोज तो गुलाम नबी आजाद से भी दो हाथ आगे निकल गए और कहा कि हम पाकिस्तान से विलय नहीं चाहते पर हमें आजादी चाहिए. हालांकि इस बयान से कांग्रेस ने किनारा जरूर कर लिया और सोज ने भी अपने इस बयान को निजी बताया. लेकिन जिस तरह देश की सुरक्षा के मामले में सोज और आजाद जैसे लोग सेना के खिलाफ प्रोपेगेंडा फैला रहे हैं, ये भी कहना गलत नहीं है कि स्थिति न सिर्फ गंभीर है बल्कि ये भी दर्शा रही है कि घाटी के नेता खुद नहीं चाहते कि घाटी आतंक से मुक्त हो और वहां खुशहाली और अमन-चेन आए. खैर इस बयान से कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं की मानसिकता का पता चलता है. कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है और रहेगा!