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Friday, 31 August 2012

लव-इन मैट्रो


मैट्रो आज दिल्ली वासियों के दिल की धड़कन बन गई है। कम खर्च में वातानुकूलित, आरामदायक सफर और वो भी समय की बचत के साथ हो तो, भला कौन इसका आनंद नहीं उठाना चाहेगा? ऐसे में प्रेमी जोड़े भला कैसे पीछे रह सकते हैं। मैट्रो इन प्रेमी जोड़े के लिए एक घोसला से कम नहीं है। जहां वे आते हैं और चंद लम्हें सुकून से बिताकर अपने-अपने रास्‍ते चले जाते हैं। मैट्रो स्टेशनों पर शोपिंग, खाना-पीना और अपने प्रेमी-प्रेमिकाओं से मिलना नसीब हो तो, इससे बढ़कर उनके लिए और क्या हो सकती है? आज मैट्रो में जगह-जगह आप ऐसे ही नजारे देख सकते हैं। जो हमें लैला-मजनू की याद दिलाती है। इसे लोकतांत्रिक स्वतंत्रता कहे या फिर बदलता भारत, चाहे जो भी हो आज की युवा पीढ़ी अपनी भावनाओं को छुपाने में नहीं बल्कि व्यक्त करने में विश्वास रखती है। बरसों पहले एक फिल्‍म आई थी मुकल-ए-आजम जिसका एक गाना बहुत मशहूर हुआ था जब प्यार किया तो डरना क्या तब तो ये गाना अपना असर नहीं छोड़ पाया, लेकिन अब इसका असर नजर आ रहा है। और यही वजह है कि आज के युवा अपने प्यार का इजहार करने से परहेज नहीं करते हैं। वो अपनी दुनिया में इतने खोए हैं कि आस-पास क्या हो रहा है उसे जानना ही नहीं चाहते हैं। प्रेमी-जोड़े दिल के हाथों मजबूर होते हैं और अक्सर ऐसी जगह की तलाश में रहते हैं जहां उन्हें किसी की रोक-टोक का समना ना करना पड़े। मैट्रो का सफर उनकी इन्हीं भावनाओं को व्यक्त करने के लिए एक आसरे का काम करता है। जहां वे चैन से अपने साथी को चाहत का इजहार कर सकें, उनकी नजदीकी महसूस कर सकें, वो भी बिना किसी पाबंदी के और यही वजह है कि मैट्रो उनके पसंदीदा सफर का माध्यम बनती जा रही है। प्रेमी-जोड़े सीट पर बैठने की वजह किसी कौने की तलाश में रहते हैं। चाहे उन्हें खड़े ही क्यों ना जना पड़े। खड़े होकर यह किया गया सफर उन्हें कितनी यादगार सौगात दे जाता है। यह तो बस वे ही जानते है। मैट्रो इनके लिए एक मनचाहा वरदान सावित हो रहा है।
बहरहाल, जो भी हो अगर शालीनता में रहकर प्यार का इजहार किया जाए तो, मैट्रो ही क्या हर जगह इनका स्वागत है। अगर समाज में रहकर थोड़ी बहुत मान्यता समाज को भी मिले तो, भला समाज को एतराज कैसा अगर आप भी अपनी यात्रा अपने प्रेमी के साथ सुखमय बनाना चाहते है तो, मैट्रो में आप सभी का स्वागत हैं।