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Wednesday, 17 February 2016

पापा का ‘ड्रीम हाउस’




आज का दिन मेरे लिए काफी खास था... आज एक तरफ खुशी का दिन भी था और दूख का दिन भी.... दरअसल आज पापा का दिया हुआ अंतिम नीशानी यानि पापा का ड्रीम हाउस में मेरी मां, बड़े भईया-भाभी और उनके बच्चों ने इस ड्रीम हाउस में अपना पहला कदम रखा... हलांकि ये ड्रीम हाउसअभी पूरी तरह से तैयार नहीं हो सका है ये अभी अंडर कंस्ट्रक्शन में है.... लेकिन फिर भी अच्छे दिन मिल जाने के कारण जल्दबाजी में इसमें गृह प्रवेश कर लिया गया.... क्योंकि इसके बाद दूर-दूर तक कोई अच्छा दिन नहीं मिल रहा था.... तो इसी बात की खुशी है कि आखिरकार आज मेरा पूरा परिवार नए आशियाने में चला गया और दूख इस बात की है कि इस मौके पर आज इस ड्रीम हाउस को बनाने वाले मेरे पापा नहीं हैं.... काश ! आज वो होते तो ये खुशी लाखों गुणा ज्यादा होता.... और गृह प्रवेश की तैयारी महीनों पहले से चल रही होती पर होनी को कौन टाल सकता है.... आज पापा जहां भी होंगे वहीं से देख कर खुश हो रहे होंगे.... आखिर उन्होंने हम सब के लिए ही तो बनाया था.... पापा आप जैसा चाहते थे बिलकुल वैसा ही ये ड्रीम हाउस बनेगा.... ये हम दोनों भाईयों का वादा है आप से.... लेकिन कही ना कही कसक तो मन में होगा ही कि काश आप होते....!


शायद आप नहीं है इस लिए इतने बड़े खुशी के पल में भी गम जैसा ही माहौल है.... किसी के चेहरे पे हंसी नहीं है.... और ना ही नए आशियाने में जाने का कोई उत्साह.... ऐसा लग रहा है मानो जैसे किसी दूसरे के घर में हम चुपके से जा रहे हो।



खैर देखिए ना मैं भी कितना बदनसीब हूं कि मैं खुद भी इस खास मौके पर नहीं पहुंच सका.... जिस कारण से मेरी मां मुझसे काफी नाराज होगी.... लेकिन क्या करें इतने जल्दबाजी में सारा प्रोग्राम बना की चाह कर भी ना जा सके... भैया ने कई बार बोला भी तुम भी नहीं आओगे तो अभी छोड़ ही देते है.... लेकिन मैने कहा नहीं अब आप ही मेरे लिए और उस घर के लिए सब कुछ हैं, आप वहां हैं तो समझिए सब हैं।