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Sunday, 13 March 2016

भाग माल्या भाग....!




देश की कई एजेंसियां माल्या को तलाश रही हैं, पर माल्या को पकड़ना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है। सरकार, पुलिस, सीबीआइ, गुप्तचर एजेंसियां सब की सब देखती रह गईं। लेकिन दो-चार दिन बीत जाने के बाद पता चला कि माल्या तो माल लेकर पिछले दरवाजे से फुर्र हो गए। अब उनके भागने पर देश में चारों तरफ हल्ला मचा है। ऐसा पहली बार थोड़ी ना हुआ है। क्वात्रोची भी कभी ऐसे ही भागा था, भोपाल गैस कांड के मुख्य आरोपी एंडरसन भी भागा था और हाल फिलहाल में ललित मोदी भी तो भागे हैं। भागने और भगाने का तो हमेशा हमारे देश में फैशन रहा है। लेकिन माल्या और मोदी के भागने के बाद ये और ज्यादा फैशनेवल हो गया है, क्योंकि ये दोनों बड़े ही फैशन प्रेमी रहे हैं। हालांकि माल्या साहब कहते है कि वो भगोड़ा नहीं है पर वो सारे बैंकों का नींद उड़ाकर... बैठे कहां हैं, ये नहीं बता रहें हैं।
दरअसल हमारे देश में करीब 90 हजार किसान ऐसे है जिन्होंने सरकारी बैंको से कर्ज लिए हैं और इन सारे किसानों के कर्ज की राशि माल्या साहब के एक फीसदी के बराबर भी नहीं है। लेकिन इसे वसूलने के लिए किसानों से मारपीट तक की जाती है और किसानों के गाय, बकरी और भैंस तक उठा लिए जाते हैं। अभी कुछ दिन पहले की ही घटना है तमिलनाडु के एक शहर में गरीबी का मारा एक किसान को पुलिस ने सिर्फ इसलिए जमकर सबके सामने पीटा क्योंकि वो सिर्फ 3.5 लाख रुपए का पूरा कर्ज नहीं चुका पा रहा था, वो भी कर्ज न चुकाने की बात नहीं कर रहा था, बल्कि फसल की बर्बादी के कारण सिर्फ 2 किस्ते नहीं भर पा रहा था, जिसको लेकर बैंक ने उसका ट्रेक्टर छीन लिया औऱ जमकर धुनाई भी की। अब सवाल है कि देश एक, कानून एक और गुनाह एक, लेकिन एक व्यापारी और एक किसान दोनों पर अलग-अलग बर्ताव क्यों? क्या उसकी गलती सिर्फ ये है की वो माल्या के तरह रसूखदार नहीं है। 
नौ हजार करोड़ रुपए का आंकड़ा लिखने में कितने शून्य आते हैं, यह देश के सामान्य आदमी को समझने में कुछ वक्त लग जाता है। लेकिन इतनी बड़ी धनराशि को डूबते हुए सारी बैंक और सरकार देखती रही लेकिन माल्या शौक पूरे करने लंदन की फ्लाइट लपक कर निकल लिए पर फिर भी सरकार कार्रवाई करने की वजह विपक्ष को ये बताने में लगी है कि आपने भी तो क्वात्रोची को भगाया। यानी अब हिसाब बराबर हो गया।
दरअसल विजय माल्या जैसे स्वघोषित रसूखदारों को बढ़ावा देने वाले राजनेता आज चाहे एक दूसरे पर जितने भी आरोप-प्रत्यारोप लगाएं पर एक बात तो तय है कि विजय माल्या और उन जैसे कारोबारी द्वारा सरकारी पैसा हड़पने के रणनीतिक कारोबार में कहीं ना कहीं राजनीतिक संरक्षण अवश्य ही मिलता रहा है। उसी का तो नतीजा है कि लोन का पैसा ना चुकाने के बावजूद देश के विभिन्न बैंकों द्वारा माल्या पर पैसे की बरसात की जाती रही और माल्या द्वारा उस पैसों से अपने तथाकथित व्यवसायों और अन्य गैरजरूरी गतिविधियों का संचालन धड़ल्ले से किया जाता रहा। माल्या को संरक्षण देने के मामले में चाहे पूर्ववर्ती सरकार की भूमिका पर विचार किया जाए या फिर उसके विदेश भागने में मौजूदा सरकार की भूमिका पर उठ रहे सवालों पर गौर करें। एक बात तो जरूर है कि सत्ता में कुछ ऐसे दलालनुमा लोगों की पैठ है जो किसी भी काले कारोबारी को सिर आंखों पर बिठाने के लिए हर समय मुस्तैद रहते हैं और शायद इसलिए इतना सब होने के बाद भी माल्या के तेवर बरकरार हैं।
कर्ज लेकर घी पीनेवाले माल्या अब विदेश में बैठ कर नेता-पत्रकार खेल रहे हैं। मीडिया में उनके खिलाफ आई खबरों और संसद में मामला उठने के बाद माल्या ने धमकी दी है कि वह उन सबका खुलासा करेंगे जो उनकी कंपनी का मुफ्त में सेवाएं ली है। यानी अब वो भी ललित मोदी की तरह रोज नए ट्वीट कर मीडिया के लिए ब्रेकिंग देते रहेंगे। यानी अब जब तक कोई दूसरा माल्या (खबर देने वाला) मीडिया को नहीं मील जाता, तब तक ऐसे ही हर चैनलों पर माल्या कथा सुनते रहिए, लेकिन यकीन मानिए जैसे सरकारें क्वात्रोची, एंडरसन और ललित मोदी का कुछ नहीं बिगाड़ पाई, वैसे इस सबसे माल्या साहब का भी कुछ बिगड़ने वाला नहीं हैं,  जब तक इस देश में क्रोनी कैपिटलिज्म है।
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