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Wednesday, 4 January 2017

नेता जी के नाम खुला खत


आदरणीय नेता जी,
प्रणाम,
मैं सोनू कुमार... एक साधारण सा पत्रकार...
आप बाप-बेटे ने तो मिल कर पिछले 4-5 दिनों से हम पत्रकारों के दिमाग का दही कर रखा है... हम कोई भी ख़बर लिखने जाए तब तक कुछ ना कुछ बदल जाता है... जैसे हम अापकी (मुलायम सिंह यादव) कोई ख़बर लिखते है तो ख़बर लिखते-लिखते हमे पता चलता है कि अापको ही पार्टी से निकाल दिया गया और जब तक हम ख़बर चलाए तब तक अाप फिर पार्टी में वापस भी आ जाते हैं... आपके रोज-रोज के इस सस्पेंस से हम पत्रकार परेशान और कन्फ्यूजन हो गए हैं... एक कन्फ्यूजन हो तब ना अब देखिये ना पता ही नहीं चल रहा कि आखिर राष्ट्रीय अध्यक्ष किसे मानें अाप (मुलायम सिंह यादव) को या अखिलेश यादव को? प्रदेश अध्यक्ष किसे मानें शिवपाल यादव को या नरेश उत्तम को? अमर सिंह को पार्टी से निष्कासित मान लें या नहीं? किरनमय नंदा और नरेश अग्रवाल पार्टी में हैं या पूर्व समाजवादी हो लिए? आपकी पार्टी का एक नारा था, ‘जलवा जिसका कायम है उसका नाम मुलायम है’ फिलहाल की हालत तो ये है कि पता ही नहीं चल रहा है कि समाजवादी पार्टी में जलवा आखिर है किसका?
नेता जी अापके राजनीतिक जीवन में चालाकियों के ना जाने कितने किस्से होंगे... इसमें कोई शक नहीं कि उनमें से कई किस्सों को अखिलेश ने अपनी आंखों के सामने जीवंत होते देखा हो... आपके राजनीतिक विरासत को संभाल रहे अखिलेश अब उन सारे दांव का अगर खुलकर इस्तेमाल कर रहे हैं तो आपको बुरा नहीं लगना चाहिए बल्कि गर्व होना चाहिए... नेता जी अगर अखिलेश को विरासत सौंपी है तो फैसले का अधिकार भी उन्हीं के पास रहने दीजिए... अब ये झगड़ा लंबा खिंच चुका है... ना केवल हम पत्रकार बल्कि जनता भी ऊब चुकी है... वोटर्स राय बनाने लगे हैं... कहीं जो फैसला अाप बाप-बेटे मिल कर नहीं कर पा रहे हैं वो जनता न कर ले... लोग सोच रहे हैं कि समाजवादियों के घर में सास बहू टाइप का ये फैमिली ड्रामा आखिर कब खत्म होगा? इसलिए जीतना जल्दी हो सके इस झगड़े को सुलझा लीजिए... आपका शुभचिंतक!

सोनू कुमार झा