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Sunday, 19 March 2017

लोकसभा चुनाव 2019: घूमेगा विकास का पहिया या चलेगा हिंदुत्व का रथ ?


उत्तर प्रदेश में रविवार से योगी राज की शुरुआत हो गई. योगी आदित्यनाथ देश के सबसे बड़े सूबे यानी यूपी के सीएम के बन गए हैं. उनके साथ केशव प्रसाद मौर्य और दिनेश शर्मा दोनों को डिप्टी सीएम बनाया गया है. देश में ये पहली बार हो रहा है जब किसी राज्य में दो डिप्टी सीएम बनाया गया हो.
एक के साथ दो मुफ्त वाले अंदाज में. पिटारा खुला तो एक नहीं पूरे तीन मुख्यमंत्री एक साथ निकले. लेकिन तीनों एक साथ बन नहीं सकते थे. लिहाजा दो को `उपबनकर एडजस्ट करना पड़ा और इस तरह यूपी के सत्ता के गलियारे में त्रिमूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा हो गई. योगी आदित्यनाथ राजपूत वर्ग से आते है केशव प्रसाद मोर्य ओबीसी चेहरा है और दिनेश चंद्र शर्मा ब्राह्मण चेहरा है. इस तरह से राजपूत ब्राह्मण और ओबीसी का पावर वैलेंस टीम मोदी ने यूपी में साधने की पूरी कोशिश की है.
2014 में नरेंद्र मोदी की सरकार बनी. एनडीए और बीजेपी को प्रचंड बहुमत विकास के मुद्दे पर मिला. कुछ समय की शांति के बाद घर वापसी,लव जेहाद और गोरक्षा जैसे संघ के तमाम एजेंडे सामने आ गए.
एक प्रधानमंत्री के तौर पर नरेंद्र मोदी ने कभी खुलकर इनमें से किसी एजेंडे का समर्थन नहीं कियालेकिन कभी कड़े शब्दों में निंदा भी नहीं की. मोदी के पैरोकार लगातार ये साबित करते रहे कि कारगुजारी चंद कट्टर लोगों की है और बदनाम बेवजह प्रधानमंत्री को किया जा रहा है.
यूपी का चुनावी नतीजा पूरी तरह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के करिश्मे और पार्टी अध्यक्ष अमित शाह की रणनीति का नतीजा था. तब सवाल ये है कि जब चुनाव विकास के मुद्धे पर लड़ा और जीता गया तो फिर ऐसी क्या मजबूरी आ पड़ी कि एक ऐसे आदमी को सीएम बनाया गयाजिसकी इकलौती पहचान आक्रमक हिंदुवादी नेता होना है.
दरअसल यूपी चुनाव के दौरान घूमा विकास का पहिया हिंदुत्व के रथ में जुड़ चुका है. अब देश की भावी राजनीति की तस्वीर बिल्कुल साफ है. विकास और हिंदुत्व नरेंद्र मोदी की राजनीति के दो इंजन थे. जब जैसी जरूरत होतीउनका वैसा इस्तेमाल होता आया था. अब नई कहानी सामने आ चुकी हैजिसके मुताबिक हिंदुत्व ही विकास है और विकास ही हिंदुत्व है. यानी साफ है कि आने वाले दिनों में एक बार फिर बीजेपी अपने पुराने रंग में दिखेगी और हिंदुत्व के मुद्दे पर ही 2019 का चुनाव लड़ा जाएगा. ऐसे में योगी आदित्यनाथ के फायर ब्रांड हिंदुत्व वाला तड़का बीजेपी वाली राजनीति के लिए सोने पर सुहागा जैसी हो सकती है.